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अभिभावकों के लिए

अबेकस क्या है, और बच्चे इसे क्यों सीखते हैं?

अबेकस गिनती का एक पुराना उपकरण है जिसमें छड़ों पर मनके लगे होते हैं. बच्चा पहले इन मनकों को हाथ से सरकाकर जोड़ना और घटाना सीखता है, और कुछ समय बाद वही काम मन में, अबेकस की तस्वीर बनाकर करने लगता है. यही इस पूरी पद्धति का उद्देश्य है.

अर्थ

अबेकस का अर्थ

हिंदी में अबेकस को गिनतारा भी कहा जाता है. यह कोई कैलकुलेटर नहीं है. कैलकुलेटर उत्तर देता है, जबकि अबेकस बच्चे को संख्या का रूप दिखाता है, ताकि वह गिनना नहीं, देखना सीखे. यही अंतर आगे चलकर मानसिक गणना बनता है.

बनावट

अबेकस के भाग

छड़ें
खड़ी छड़ें, दाएँ से बाएँ इकाई, दहाई, सैकड़ा और आगे. हर छड़ एक अंक रखती है.
विभाजक पट्टी
बीच में लगी आड़ी पट्टी, जो ऊपर और नीचे के मनकों को अलग करती है. गिनती हमेशा इसी पट्टी के सापेक्ष होती है.
ऊपर का मनका
पट्टी के ऊपर एक मनका, जिसका मान पाँच होता है. उसे नीचे सरकाने पर वह गिनती में आता है.
नीचे के मनके
पट्टी के नीचे चार मनके, हर एक का मान एक. ऊपर सरकाने पर वे गिनती में आते हैं.

इस तरह एक छड़ पर शून्य से नौ तक कोई भी अंक बनाया जा सकता है, और कई छड़ें मिलकर बड़ी संख्याएँ बनाती हैं.

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इतिहास

अबेकस कहाँ से आया

इसका कोई एक आविष्कारक नहीं है. गिनती की पट्टियाँ कई प्राचीन सभ्यताओं में अलग-अलग समय पर बनीं, क्योंकि हर जगह लोगों को बड़ी संख्याएँ संभालने की ज़रूरत पड़ी. बाद में चीन में सुआनपान बना, और उसी से जापान का सोरोबन विकसित हुआ.

हम सोरोबन पद्धति पढ़ाते हैं. इसका कारण सीधा है: सोरोबन में मनकों की संख्या कम है, हाथ की गति सरल है, और भौतिक अबेकस से मानसिक अबेकस तक का रास्ता सबसे स्पष्ट है.

प्रश्न और उत्तर

माता-पिता सबसे पहले यही पूछते हैं

अबेकस क्या होता है?

अबेकस गिनती करने का एक उपकरण है जिसमें छड़ों पर मनके लगे होते हैं. हर छड़ एक स्थानीय मान दिखाती है, यानी इकाई, दहाई, सैकड़ा और आगे. मनकों को ऊपर या नीचे सरकाकर संख्याएँ बनाई जाती हैं और जोड़, घटाव, गुणा तथा भाग किया जाता है.

अबेकस का आविष्कार किसने किया?

किसी एक व्यक्ति ने नहीं. गिनती की पट्टियाँ कई प्राचीन सभ्यताओं में अलग-अलग समय पर बनीं. बाद में चीन का सुआनपान और फिर जापान का सोरोबन विकसित हुआ. हम सोरोबन पद्धति सिखाते हैं, क्योंकि उसी में मानसिक गणना तक पहुँचने का क्रम सबसे स्पष्ट है.

बच्चे को अबेकस किस उम्र में शुरू करना चाहिए?

छह से बारह साल के बीच. छह से पहले उँगलियों का नियंत्रण पूरा नहीं होता, और बहुत बड़ी उम्र में कैलकुलेटर की आदत बन चुकी होती है. हर बच्चा लेवल 1 से ही शुरू करता है, चाहे वह गणित में पहले से अच्छा क्यों न हो.

अबेकस सीखने में कितना समय लगता है?

पूरे पाठ्यक्रम में दस लेवल होते हैं और हर लेवल में लगभग तीन से साढ़े तीन महीने लगते हैं. हर लेवल के अंत में एक परीक्षा होती है, और बच्चा तभी आगे बढ़ता है जब परीक्षा कहती है कि वह तैयार है.

क्या अबेकस से बच्चे का गणित सुधरता है?

गणना की गति दिखाई देने वाला हिस्सा है. माता-पिता हमें सबसे पहले जो बदलाव बताते हैं वह एकाग्रता का होता है, यानी बच्चा एक सवाल पर पूरा एक मिनट बिना ध्यान भटकाए बैठ पाता है. यही आदत हर विषय के होमवर्क में दिखती है.

क्लास कैसे चलती है?

सप्ताह में दो लाइव क्लास, हर एक घंटे की, एक बैच में ज़्यादा से ज़्यादा दस बच्चे. क्लास रिकॉर्ड नहीं की जाती. घर पर रोज़ लगभग पंद्रह मिनट अभ्यास करना होता है, और यही तय करता है कि बच्चा कितनी तेज़ी से आगे बढ़ेगा.

पढ़ने से ज़्यादा, एक क्लास देखकर समझ आता है.

डेमो क्लास तीस मिनट की एक असली क्लास है, उसी शिक्षक के साथ जो आगे आपके बच्चे को पढ़ाएँगे. इसके लिए कोई शुल्क नहीं है, और क्लास से पहले कुछ भी तय करने को नहीं कहा जाता.

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दसों लेवल विस्तार से पढ़ें (अंग्रेज़ी में).